कारगिल शहीद रामसमुझ को देश के नायकों सहित लोगों ने पुष्प अर्पित कर किया नमन।

कारगिल शहीद रामसमुझ को देश के नायकों सहित लोगों ने पुष्प अर्पित कर किया नमन।

सगड़ी संवाददाता राम मिलन यादव

आजमगढ-सगड़ी तहसील क्षेत्र के नत्थुपुर अंजान शहीद के शहीद पार्क में कारगिल शहीद शहीद राम समुझ यादव की 23वीं सहादत दिवस पर शहीद मेला एव श्रद्धाजंलि सभा का आयोजन किया गया परमवीर चक्र विजेता संजय कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि भारत को लड़ने की आवश्यकता क्यों पड़ी भारत ने कभी भी आक्रमण नहीं किया लेकिन भारत पर जब-जब आक्रमण हुआ मुंहतोड़ जवाब दिया भारतीय सेना घुसना भी जानती है और निकलना भी जानती है। शहीद मेला में पूर्वांचल के कुल 25 शहीद परिवारों को अंगवस्त्रम एव मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। कारगिल शहीद रामसमुझ यादव की याद में आयोजित शहीद मेला में शहीद की प्रतिमा पर शहीद के के पिता राजनाथ यादव,प्रमोद यादव,भतीजे भतीजियों में अभय यादव,अभिनव यादव,आशीष यादव,आराध्या यादव,कारगिल योद्धा दीपचंद, राइफल मैन सूबेदार परमवीर चक्र विजेता संजय कुमार डाक्टर अनूप यादव आदि दर्जनों लोगों ने श्रद्धा सुमन अर्पित किया।इस दौरान मेले जैसा पूरा माहौल बना रहा जहां कई तरह की दुकानें सजी रही। कारगिल योद्धा दीपचंद ने कहा कि क्या आप लोग कभी जिंदा सैनिकों को सम्मान दे सकते हो।कम ही सैनिक मिलते है जो सैनिकों की कहानी सुना सके। हम सैनिक जो है सबसे मजबूत होते है।भारत देश के बारे में कोई नही सोचता।आवाम को अभी भी समय है सेना देश और देश की जनता के लिए जीती है।पर आज देश का नेता सैनिकों के बारे में नही सोचता हमारा हर कदम देश के लिए आजीवन समर्पित रहेगा। वहीं मुख्य अतिथि परमवीर चक्र विजेता राइफल मैन एव सूबेदार संजय कुमार ने कहा कि हमने आज मेले में जो कुछ देखा वह अनोखा है।पूरे देश मे शहिदों का मेला भाई द्वारा लगाना यह आजमगढ की मिट्टी में ही है जो एक भाई कर रहा है जो पूरे देश मे नही है।जिन शहीदों ने श्रद्धांजलि दी है उन शहीदों का सम्मान होना चाहिए।वह सैनिक जब अपना सर्वत्र न्योछावर करता है तो उसके जनाजे में नेता प्रशासन तो आते है पर बाद में सब भूल जाते है।सैनिक परिवार का जो दर्द है वह परिवार आजीवन सहन करता है।मेरे साथ भी कई सैनिक शहीद हुए पर इस तरह का सम्मान जो एक भाई द्वारा किया जा रहा है वह आज तक नही देखा।इस तरह का सम्मान आने वाले समय मे प्रेरणा का काम करेगा।कहि भी खड़े होकर भाषण देने आसान है पर शहीद हुए लोगो को सम्मान देना देश का सम्मान है।बहुत सारे लोग है जो आप के साथ कंधा मिलाकर चलने को तैयार है। जरुरी है कि बचपन से ही संस्कार दे।कारगिल में बहुत सारे सैनिकों ने अपना सर्वत्र न्योछावर किया है।जब भी युद्ध हुआ तो भारत ने आक्रमण नही किया है हमेशा दुश्मनों ने हमला बोला है। लेकिन भारत ने मुंहतोड़ जवाब दिया भारतीय सेना घुसना भी जानती है और निकलना भी जानती है सैनिक देश के हौसले से लड़ता है।सभी सैनिक जानते है कि लड़ाई पर जाने को जिंदा आने के कम चांस होते है। कारगिल युद्ध में ग्रास सेक्टर सबसे ज्यादा ठंडक और सबसे ऊंची पहाड़ी पर पहले से घात लगाकर बैठे दुश्मन पर युद्ध से पहले शहीद की मन में पहले से ही देश के लिए शहादत देने का जज्बा किससे और कैसे बताएं। आजमगढ में इस स्थान से पूरे देश मे जो सन्देश देने की जो पहल की है वह एक मिसाल है।जो सम्मान आप ने हमे दिया वह हमारे लिए एक बड़ा सम्मान है आप एक मुट्ठी में जबतक हो कोई आप को तोड़ नही सकता। इस दौरान कहरवा,धोबिया नृत्य की और छात्रों द्वारा बेहतरीन एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति देकर मन मोह लिया।वीरेन्द्र भारती ने कई शहीद गीत और लोक गीत प्रस्तुत किये।साथ ही देश के कई कवियों ने अपनी रचनाओं से उपस्थित लोगों को तालिया बजाने पर मजबूर कर दिया।बादशाह प्रेमी ने हास्य कविताओं से जमकर गुदगुदाया।इस दौरान डाक्टर अनूप यादव,हवलदार यादव,विश्वप्रकाश सिंह मुन्नू,उधम सिंह राठौर,मनोज यादव गीत कार, राज नाथ यादव राजेश यादव, शंकर यादव,अरबिंद जायसवाल आदि लोग मौजूद रहे।